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नवजात शिशु के कफ का इलाज

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नवजात शिशु के कफ का इलाज
नवजात शिशु के कफ का इलाज

नमस्ते दोस्तों आप सभी तो जानते ही होगे मौसम में जैसे-जैसे बदलाव होते हैं हमारे शरीर पर भी उसके परिणाम होने लगते हैं | और आजकल तो मौसम का कुछ कहा नहीं जा सकता | पिछले दो-तीन सालों से मौसम में तरह तरह के बदलाव आ रहे हैं | जिससे हमारे स्वास्थ्य बिगड़ रहे हैं | चलो बड़ों की तो बात छोड़ भी दो, बच्चों को बच्चों की इम्युनिटी सिस्टम बहुत कमजोर हो गई है | उन्हें बहुत प्रकार की स्वास्थ्य की तकलीफ हो रही है | नवजात शिशु को तो सबसे ज्यादा जल्दी इंफेक्शन हो जाता है | नवजात बच्चों को कफ होने का सबसे बड़ा कारण हो सकता है वायरल या बैक्टीरियल इनफेक्शन | जैसे कि हमें पता है छोटे बच्चों की इम्यून सिस्टम बहुत कमजोर होती है तो उनको कब सर्दी या गर्मी कौन से भी मौसम में हो सकता है | आज हम जानेंगे की नवजात शिशु के कफ का इलाज !

जब भी किसी नवजात बच्चे को कफ की परेशानी हो जाती है, उन्हें सांस लेने में तकलीफ होने लगती है | उन्हें उल्टी, बुखार सर्दी जैसी बीमारियों का सामना करना पड़ता है | ऐसी हालात में बच्चे बड़े बेचैन हो जाते हैं | अगर सही टाइम पर इसका इलाज न किया जाए तो समस्या गंभीर भी हो सकती है | अभी हम इस लेख में आपको बच्चों को कफ होने के कारण और उसके ऊपर घरेलू उपाय बताने वाले हैं |

कफ का मतलब क्या होता है ?

गले में बलगम होना मतलब का होना होता है | जैसे कि बाहर की धूल मिट्टी प्रदूषण जब अपने नवजात बच्चे के शरीर के अंदर नाक या मुंह के द्वारा जाती है, तब यह बलगम तैयार होना शुरू हो जाता है | और सर्दी जुकाम जैसी बीमारियां होने लगती है | अगर यह बलगम छाती से बाहर ना निकले तो यह शरीर में जमा होने लगता है | और इसकी वजह से सबको तकलीफ होने लगती है, इस बलगम को ही कफ जमा होना ऐसा कहते हैं |

कफ होने के लक्षण क्या होते हैं ?

नवजात शिशु को सांस लेने में तकलीफ होना :

अगर आपके नवजात बच्चे को अचानक से सांस लेने में तकलीफ होने लगे. या उसकी सांस फूलने लगे तो समझ जाना उसे कफ हो गया है | सांस लेने में तकलीफ होना यह कफ होने का सबसे प्रथम प्रमाण है |

खांसी हो जाना :

नवजात शिशु को अगर बुखार होने लगे और खांसी सर्दी जैसी बीमारी होने लगे तो समझ जाना यह कब होने की शुरुआत है | क्योंकि कब के भी दो प्रकार होते हैं एक ड्राई कफ के स्वरूप में होता है और एक वेट कफ के बारे में होता है | अगर खाते वक्त आवाज आने लगे तो समझ लेना छाती में कफ भर चुके हैं |

बच्चे को बुखार आना :

जब भी हमारे शरीर में किसी भी विषाणु का बैक्टीरिया का संक्रमण होता है उस वक्त हमारे शरीर की कोशिकाएं उससे लड़ने की कोशिश करती हैं | इस दौरान हमारे शरीर का तापमान अचानक से बढ़ने लगता है क्योंकि हमारे शरीर में सेल्फ डिफेंस टेक्निक्स होती है लेकिन ऐसा होते वक्त नवजात शिशु को बुखार हो जाता है |

नवजात शिशु का मूड खराब होना बार-बार रोना :

बच्चों का जब भी कम हो जाता है सांस लेने में तकलीफ होने लगती है | तो उनका स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है | वह थोड़ी थोड़ी देर में रोने लगते हैं यह भी कम होने का एक लक्षण है |

नवजात शिशु को अनिद्रा होना :

जब भी बच्चों को कम हो जाता है वह ठीक से सो नहीं पाते | सोते वक्त सांस ठीक से ना लेने के कारण उन्हें तकलीफ होने लगती है और उनकी नींद खराब हो जाती है |

बच्चे की भूख कम हो जाना :

सर्दी जुकाम कफ की वजह से बच्चा स्वस्थ हो जाते हैं  और उसका परिणाम उनकी सुपर हो जाता है | कफ की वजह से बच्चों को भूख नहीं लगती |

नवजात शिशु को कफ होने के कारण :

छोटे बच्चों को सर्दी खांसी कफ होने के बहुत से कारण हो सकते हैं इन सभी की जानकारी विस्तार से नीचे दी गई है |

सर्दी बुखार होना :

सर्दी बुखार को कब होने का मुख्य कारण माना जा सकता है | क्योंकि जब भी हमें सर्दी बुखार होता है तभी विषाणु ओं का संक्रमण हमारी स्वसन नलिका में हो जाता है | और अगर तब बलगम बाहर ना निकले तो वह छाती में फंस जाता है और उससे कफ की निर्मिती होती है |

नवजात बच्चों की इमेज सिस्टम कम होना :

अगर नवजात बच्चे की इमेज सिस्टम कमजोर हो तब भी उसे जल्दी कब हो सकते हैं | वातावरण में होने वाले बदलाव का परिणाम नवजात बच्चे के शरीर पर जल्दी से हो जाता है |

श्वसन के रोग :

बहुत से बच्चों को जन्म तथा श्वसन के रोग होते हैं | जिसकी वजह से उनको कफ्फ जैसे परेशानियों का सामना बार-बार होते रहता है |

नवजात बच्चे के कफ कम करने के लिए घरेलू उपाय :

नवजात बच्चों का कफ जाने के लिए उन्हें अजवाइन और लहसुन को एक पोटली में बांधकर थोड़ा सा हल्का सा गर्म करें | और उस पोटली से उनकी छाती पर थोड़ा सा शेख दें इससे उनकी खासी और कफ बंद होने में मदद हो जाएंगे |

मां का दूध भी बच्चे को किसी दवाई से कम नहीं होता | अगर आपका बच्चा 4 या 6 महीने का ही हो तो उसे ज्यादा दवाई ना दे थोड़े घरेलू उपाय और मां का दूध ही दीजिए | जिससे उसके सारे परेशानियां दूर हो जाएंगे |

जब भी बच्चे के छाती में कफ अटक जाए तो उसे सीधा करके थोड़ा घूम आए उसकी पीठ को हल्के हाथों से थपथपाई जिससे उसका बलगम पास हो जाए |

अगर कप की समस्याएं ज्यादा बढ़ जाए तो बच्चे को तुरंत डॉक्टर के पास लेकर जाए और उनकी सलाह से उनका इलाज कीजिए |

आशा करते हैं कि ऊपर दी गई सभी जानकारी का आपको फायदा होगा | अगर आप कोई सुझाव देना चाहते हैं या फिर आपके अगर कोई सवाल हो तो कमेंट जरूर करें |

धन्यवाद !

 

 

 

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